हल्द्वानी। बनारस और दिल्ली में प्राचीन मंदिरों तथा देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटनाओं के विरोध में कांग्रेस ने कड़ा आक्रोश जताया है। इन घटनाओं को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर प्रहार बताते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और भाजपा सरकार का पुतला फूंका।

यह प्रदर्शन हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।

इस अवसर पर विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि मंदिर और देवी-देवताओं की मूर्तियां केवल पूजा स्थल नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी प्राचीन सभ्यता, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने काशी के मणिकर्णिका घाट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल सनातन धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां अंतिम संस्कार को मोक्ष का मार्ग माना जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि काशी में प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को मशीनों से तोड़ा जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। यह कृत्य करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है और सरकार की असंवेदनशील मानसिकता को उजागर करता है।

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि काशी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल पर मंदिरों को नुकसान पहुंचाना बेहद शर्मनाक घटना है। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक स्थलों पर हमला नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक धरोहर पर भी चोट है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने दिल्ली के झंडेवाला मंदिर से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि देश की राजधानी में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित न होना सरकार की विफलता को दर्शाता है। यह घटना आस्था और परंपराओं के प्रति सरकार के उदासीन रवैये को सामने लाती है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

पुतला दहन कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें हरीश मेहता, सतीश नैनवाल, हेमंत बगड़वाल, प्रकाश पांडे, हरेंद्र बोरा, एन.बी. गुणवंत, सुहैल सिद्दीकी, नंदन दुर्गापाल सहित सैकड़ों पार्टी पदाधिकारी शामिल थे।

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