हल्द्वानी। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तराखंड ने 11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड बंद में शामिल न होने का निर्णय लिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नवीन चंद्र वर्मा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने के बाद अब बंद का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में नारी को देवी का दर्जा दिए जाने की परंपरा रही है, ऐसे में एक बेटी के साथ हुई अमानवीय घटना न केवल शर्मनाक है बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कलंक भी है। संगठन इस जघन्य अपराध की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
प्रदेशभर में फैली 383 नगर इकाइयों वाले व्यापार मंडल को 11 जनवरी के प्रस्तावित बंद के समर्थन में सामाजिक और महिला संगठनों की ओर से लगातार अनुरोध मिल रहे थे। वीआईपी संलिप्तता की आशंकाओं और सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदेश में आंदोलन का माहौल भी बना हुआ था।
हालांकि व्यापार मंडल ने कहा कि अब जब राज्य सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है, तो बंद का उद्देश्य समाप्त हो गया है। इसी के चलते संगठन ने आधिकारिक रूप से बंद से अलग रहने और इसे वापस लेने का फैसला किया है।
प्रेस वार्ता के माध्यम से व्यापार मंडल ने अपने सभी पदाधिकारियों और नगर इकाइयों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम में न रहें और अपने प्रतिष्ठानों को सामान्य रूप से संचालित करें। साथ ही सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों से भी आग्रह किया गया है कि वे इस मुद्दे पर व्यापार मंडल से बंद के समर्थन के लिए संपर्क न करें।
इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष प्रमोद गोयल, जिलाध्यक्ष विपिन गुप्ता और प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे।
