भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर अपने अप्रत्याशित फैसले को लेकर चर्चा में है। रविवार को पार्टी ने बिहार के पटना स्थित बांकीपुर से विधायक और राज्य सरकार में मंत्री नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी। यह फैसला कई मायनों में चौंकाने वाला माना जा रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लंबे समय से किए गए सांगठनिक कार्यों का परिणाम बताया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाने के बाद किसी विधायक-मंत्री को राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई? साथ ही, सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी यह निर्णय अलग दिखाई देता है। बिहार की जातिगत गणना के अनुसार कायस्थ समाज की आबादी सीमित है, बावजूद इसके भाजपा ने नितिन नवीन पर भरोसा जताया।

दरअसल, नितिन नवीन का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2005 में उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की असामयिक मृत्यु के बाद वे राजनीति में सक्रिय रूप से आगे आए। परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद पटना पश्चिमी (अब बांकीपुर) विधानसभा सीट से लगातार जीतते हुए उन्होंने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई।

संगठन के स्तर पर भी नितिन नवीन ने खुद को साबित किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलीं और पार्टी ने उन्हें सिक्किम व छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक कार्यों के लिए भेजा। खासतौर पर छत्तीसगढ़ में प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका को भाजपा की वापसी से जोड़कर देखा जाता है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यह नियुक्ति न तो क्षेत्रीय संतुलन के कारण है और न ही जातिगत गणित का परिणाम। भाजपा के अनुसार, नितिन नवीन को यह जिम्मेदारी उनकी संगठनात्मक क्षमता, अनुशासन और कार्यकर्ताओं के बीच विश्वसनीयता के आधार पर दी गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य के संकेत भी देता है। जिस तरह जेपी नड्डा को पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था और बाद में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, उसी राह पर नितिन नवीन को आगे बढ़ाया जा सकता है। मोदी-शाह युग की भाजपा में ऐसे फैसले असंभव नहीं माने जाते।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नितिन नवीन को देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कर्मठ, युवा और जमीनी नेता बताते हुए विश्वास जताया कि उनकी ऊर्जा पार्टी को और सशक्त बनाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि नितिन नवीन ने युवा मोर्चा से लेकर राज्य सरकार तक हर दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया है और उनका यह पद पर पहुंचना मेहनती कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। फिलहाल, भाजपा के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी संगठन में काम करने वालों को आगे बढ़ाने की नीति पर लगातार अमल कर रही है — और नितिन नवीन इसका ताजा उदाहरण हैं।

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