देहरादून। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का नाम शामिल किया गया है। उन्हें वर्ष 2026 के लिए देश के प्रतिष्ठित पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान सार्वजनिक जीवन, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए दिया जा रहा है।
भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहने के साथ-साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके सम्मान की घोषणा से उत्तराखंड में खुशी की लहर है और राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई दी है।
साधारण परिवार से शीर्ष पदों तक का सफर
पिथौरागढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मे कोश्यारी ने कठिन परिस्थितियों में अपनी शिक्षा पूरी की। प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा अल्मोड़ा महाविद्यालय तक उन्होंने मेहनत और लगन के बल पर हासिल की।
राजनीति और सामाजिक जीवन में अहम भूमिका
वर्ष 1966 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देते हुए उन्होंने पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की और लंबे समय तक अध्यापन कार्य भी किया।
छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले कोश्यारी ने विधायक, विधान परिषद सदस्य, मुख्यमंत्री, लोकसभा व राज्यसभा सांसद जैसे कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। बाद में उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई।
पद्मभूषण सम्मान की घोषणा को उनके संघर्ष, समर्पण और लंबे सार्वजनिक जीवन की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
