नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ की शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने भारत-ईयू संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। इसी कूटनीतिक पृष्ठभूमि में प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समझौता भारत के लिए सिर्फ व्यापार बढ़ाने का जरिया नहीं होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में बदलते समीकरणों के बीच एक रणनीतिक शिफ्ट भी साबित हो सकता है। आकलन है कि भारत बिना नई फैक्ट्रियां लगाए या अतिरिक्त उत्पादन क्षमता बढ़ाए यूरोपीय संघ को 10 से 11 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त निर्यात कर सकता है।

गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ की भागीदारी ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका में बढ़ते टैरिफ और नीतिगत अनिश्चितता के कारण वैश्विक व्यापार संतुलन बदल रहा है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका की बजाय यूरोपीय बाजार पर फोकस करने से भारत को कम जोखिम के साथ निर्यात बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

बीते तीन वर्षों से भारत-ईयू का वस्तु व्यापार लगभग 136.5 अरब डॉलर पर स्थिर है, लेकिन एफटीए के बाद इसमें नई गति आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल यूरोपीय संघ के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी 3% से भी कम है, जो भविष्य की बड़ी संभावनाओं की ओर इशारा करती है।

निवेश के लिहाज से भी यूरोपीय संघ भारत का अहम साझेदार बना हुआ है। पिछले दो दशकों में ईयू से भारत में 119 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आ चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर दिखी कूटनीतिक गर्मजोशी भारत-ईयू एफटीए को जल्द आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

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