हल्द्वानी / नई दिल्ली: हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे भूमि अतिक्रमण से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टलने से हजारों परिवारों ने राहत की सांस ली है। अदालत ने इस मामले की अगली संभावित तारीख 17 सितंबर तय की है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की पीठ के समक्ष मामला शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल होने के बावजूद, अन्य आपातकालीन मामलों की व्यस्तता के कारण आज इस पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। संभावित फैसले को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने हल्द्वानी में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। सोशल मीडिया पर अफवाहों को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में दंगा विरोधी दस्ते, ड्रोन कैमरे और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।
यह दशकों पुराना विवाद लगभग 30 हेक्टेयर जमीन का है, जहां 50,000 से अधिक लोग पीढ़ियों से रहने का दावा कर रहे हैं। वहीं रेलवे का तर्क है कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इस जमीन को खाली कराना बेहद जरूरी है। फिलहाल, सर्वोच्च अदालत का रुख यही है कि किसी भी बेदखली से पहले प्रभावित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और वित्तीय सहायता के तहत पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
